अधिकतर लोग सोचते हैं कि वे अच्छे हैं। पर हमें यह पूछना चाहिए, किसके मापदंड से अच्छे?

सिर्फ अपना मापदंड काफी नहीं है। अन्तिम न्यायी परमेश्‍वर हैं। वे सब कुछ देखते हैं और हर दिल को जानते हैं। परमेश्‍वर सिद्ध, पवित्र और भला है। उनका मापदंड है पूर्ण धार्मिकता। बाइबल कहती है कि सब ने पाप किया है और परमेश्‍वर की महिमा से रहित हैं (रोमियों 3:23)।

पाप का अर्थ है परमेश्‍वर की आज्ञा न मानना। पाप में गलत काम, गलत बातें, गलत विचार और गलत इच्छाएँ सब शामिल हैं। परमेश्‍वर ने अपनी व्यवस्था (कानून) दी, ताकि हमें पता चले कि क्या सही है और क्या गलत (निर्गमन 20:1–17; रोमियों 3:20)।

अपने‑आपको परमेश्‍वर की व्यवस्था से परखिए

सच‑मुच ईमानदार बनिए। परमेश्‍वर को धोखा नहीं दिया जा सकता।

क्या आपने हमेशा परमेश्‍वर को सब से बढ़कर प्यार किया है? क्या आपने कभी किसी झूठे देवता की आराधना की है, या अपने मन से परमेश्‍वर की कल्पना बना ली है? क्या आपने कभी परमेश्‍वर का नाम, या यीशु का नाम, लापरवाही से या अनादर के साथ लिया है? क्या आपने हमेशा अपने समय, अपनी आराधना और अपने जीवन से परमेश्‍वर का आदर किया है? क्या आपने हमेशा अपने माता‑पिता का आदर किया है? क्या आपने कभी किसी से घृणा की है? परमेश्‍वर कहते हैं कि मन में घृणा करना मन में हत्या के समान है (1 यूहन्ना 3:15)। क्या आपने कभी किसी पर कामुक दृष्टि से नज़र डाली है? यीशु ने कहा कि कामुक दृष्टि मन में व्यभिचार के समान है (मत्ती 5:28)। क्या आपने कभी कुछ चुराया है, चाहे बहुत छोटा ही क्यों न हो? क्या आपने कभी झूठ बोला है, चाहे केवल एक ही बार? क्या आपने कभी किसी और की वस्तु को लालच से चाहा है?

ये आज्ञाएँ हमें दिखाती हैं कि हम निर्दोष नहीं हैं। यदि हमने परमेश्‍वर की व्यवस्था तोड़ी है, तो हमने उनके विरुद्ध पाप किया है।

क्योंकि परमेश्‍वर भले और न्यायी हैं, इसलिए उन्हें पाप दण्डित करना ही होगा। बाइबल कहती है कि पाप की मज़दूरी मृत्यु है (रोमियों 6:23)। यह भी कहती है कि मनुष्यों के लिए एक बार मरना ठहराया गया है, और उसके बाद न्याय (इब्रानियों 9:27)। पाप के लिए परमेश्‍वर का अन्तिम दण्ड नरक है (मत्ती 10:28; प्रकाशितवाक्य 20:14–15)।

बहुत‑से लोग सोचते हैं कि अच्छे काम उनके दोष को मिटा सकते हैं। पर अच्छे काम पाप को नहीं मिटा सकते। जैसे कोई दोषी अपराधी किसी भले न्यायाधीश के सामने खड़े होकर कहे, “मैंने बहुत अच्छे काम भी किए हैं।” फिर भी न्यायाधीश को अपराध का न्याय करना ही होगा।

बहुत‑से लोग यह भी सोचते हैं कि केवल दुखी होना ही काफी है। हमें अपने पाप पर दुखी होना चाहिए और उससे फिरना भी चाहिए। पर केवल दुखी हो जाना पाप का दाम नहीं चुका सकता। कोई अच्छा न्यायाधीश केवल इसलिए अपराध को नज़रअन्दाज़ नहीं कर देता कि अपराधी को अफ़सोस हो रहा है।

तो प्रश्न यह है:

पवित्र और न्यायी परमेश्‍वर दोषी मनुष्यों को कैसे क्षमा कर सकते हैं?

शुभ समाचार

परमेश्‍वर ने पापियों के लिए क्षमा का मार्ग बनाया है।

परमेश्‍वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नाश न हो, पर अनन्त जीवन पाए (यूहन्ना 3:16)।

यीशु मसीह परमेश्‍वर का अनन्त पुत्र है। वे सच‑मुच मनुष्य बनकर आए। उन्होंने पूर्ण और निष्पाप जीवन जिया (इब्रानियों 4:15; 1 पतरस 2:22)। उन्होंने कभी विचार, वचन या कर्म से पाप नहीं किया।

फिर यीशु ने स्वेच्छा से क्रूस पर अपने को बलि कर दिया। वे अपने पापों के लिए नहीं मरे, क्योंकि उनमें कोई पाप था ही नहीं। वे पापियों के लिए मरे। बाइबल कहती है कि जब हम अभी पापी ही थे, तो मसीह हमारे लिए मरे (रोमियों 5:8)।

क्रूस पर यीशु ने वह दण्ड अपने ऊपर ले लिया जो पापियों को मिलना चाहिए था। उन्होंने पापों के लिए एक ही बार दुःख उठाया — धर्मी ने अधर्मियों के लिए — ताकि हमें परमेश्‍वर के पास ले आए (1 पतरस 3:18)। परमेश्‍वर ने हमारा पाप मसीह पर डाल दिया, ताकि हम उसमें होकर धर्मी ठहरें (2 कुरिन्थियों 5:21)।

यीशु मरे, दफनाए गए, और तीसरे दिन जी उठे। उनके पुनरुत्थान के बाद बहुत‑से गवाहों ने उन्हें जीवित देखा (1 कुरिन्थियों 15:3–6)। उनका जी उठना दिखाता है कि वे प्रभु हैं, उनकी बलि को स्वीकार किया गया, और उनके पास मृत्यु पर अधिकार है।

यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान के कारण परमेश्‍वर न्याय से समझौता किए बिना पापियों को क्षमा कर सकते हैं। उद्धार हमारे भलेपन पर आधारित नहीं है। यह यीशु मसीह और उसके पूरे किए हुए काम पर आधारित है।

तुम्हें क्या करना चाहिए?

परमेश्‍वर सब लोगों को हर जगह आज्ञा देता है कि वे मन फिराएँ, क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है जब वह जगत का न्याय करेगा (प्रेरितों के काम 17:30–31)।

मन फिराना (पश्चाताप) का अर्थ है पाप से मुड़कर परमेश्‍वर की ओर लौट आना। यह केवल दुःखी होना नहीं है; यह मन और हृदय का बदल जाना है।

यीशु पर विश्वास करने का अर्थ है उन पर भरोसा रखना। अपने भले कामों, धर्म-कर्म, प्रार्थनाओं, रीति‑रिवाजों या अपने प्रयासों पर भरोसा मत रखिए। केवल यीशु मसीह पर भरोसा रखिए।

बाइबल कहती है कि उद्धार और किसी के द्वारा नहीं, क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया है, जिसके द्वारा हम उद्धार पा सकें (प्रेरितों के काम 4:12)। बाइबल यह भी कहती है, “प्रभु यीशु पर विश्वास कर, तो तू उद्धार पाएगा” (प्रेरितों के काम 16:31)।

परमेश्‍वर के पास एक दोषी पापी की तरह आइए। अपना पाप मान लीजिए। पाप से फिर जाइए। केवल यीशु मसीह पर भरोसा रखिए।

यदि आप मन फिराकर उस पर विश्वास करेंगे, तो परमेश्‍वर आपको क्षमा करेगा, आपको अपने साथ ठीक संबंध में लाएगा, और आपको अनन्त जीवन देगा।

बाइबल कहती है कि पाप की मज़दूरी मृत्यु है, परन्तु परमेश्‍वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है (रोमियों 6:23)।

देरी मत कीजिए। आज ही परमेश्‍वर की ओर लौट आइए। अपना विश्वास यीशु मसीह पर रखिए। फिर बाइबल पढ़िए और सीखिए कि उनकी कैसी आज्ञाकारिता में चलना है।